पंजाब :- अमृतसर शहर के जोड़ा बाजार में शुक्रवार शाम करीब 6:50 बजे रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे लोग दो ट्रेनों की चपेट में आ गए। हादसे में 70 लोगों की मौत हो गई। 142 जख्मी हुए हैं। रावण दहन का कार्यक्रम पटरियों के पास ही हो रहा था। वहां कोई बैरिकैडिंग नहीं थी। तेज पटाखों के शोर में ट्रेनों की आवाज दब गई और लोग हादसे का शिकार हो गए। इस घटना के बाद 13 ट्रेनें रद्द की गईं। घटना के शोक में शहर में आज स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों की छुट्टी कर दी गई है। अमृतसर रेलवे प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर 0183- 2223171 और 0183-2564485 जारी किए हैं।

पटाखों में ट्रेन की आवाज नहीं सुनाई दीप्रत्यक्ष दर्शी जज नगर नि वासी मनप्रीत ने बताया कि हर साल यहां दशहरा मनाया जाता है। पिछले साल कि सी वजह से यहां रावण नहीं जलाया गया। इस बार 29वीं बार यह कार्यक्रम रखा गया था। पहले तो भीड़ इकट्ठी करने के लिए यहां गाने-बजाने का प्रोग्राम था। अंदर जगह कम हुई तो लोग बाहर इकट्ठे हो गए। मैं भी अपनी छत पर खड़ा होकर वीडियो बना रहा था। 400 से ज्या दा लोग रेलवे ट्रैक पर खड़े रहे होंगे। शाम 6:50 बजे रावण के पुतले को आग लगा दी गई। पटाखों की आवाज की वजह से साथ खड़े लोगों की आवाज तक नहीं सुनाई दे रही थी। कई लोगों ने तो उंगलियाें से कार बंद कर लिए। इसी बीच जालंधर की तरफ से ट्रेन पहुंच गई। उसकी आवाज व हाॅर्न की आवाज भी सुनाई दे रही थी। कुछ ने ट्रेन को देखकर पैर पीछे कि ए तो दूसरी तरफ अमृतसर की तरफ से ट्रेन आ गई और सभी कुचले गए।

रायपुर जैसी व्यवस्था होती तो टल सकता था यह हादसाछत्तीसगढ़ के रायपुर की व्यवस्था से यह हादसा टल सकता था। रायपुर के वैगन रिपेयर शॉप कॉलोनी में भी रावण का सबसे बड़ा पुतला जलता है। शुक्रवार को भी यहां हजारों लोग जुटे। लेकिन इंतजाम ऐसा था कि पूरे ट्रेक को खाली करा लिया गया।

तो बच सकती थीं जानें: अगर ड्राइवर को वक्त पर बता दिया जाता रेलवे के एक पूर्व ड्राइवर ने बताया कि 85-90 कि लोमीटर की स्पीड में डीएमयू की इमरजेंसी ब्रेक लगाई जा स

कती है। इसके बाद 650 मीटर पर ट्रेन रुक जाती है। ट्रेक के आसपास कोई मेला या आयोजन होने की स्थिति में कॉशन मिलना चाहिए। इसके तहत लास्ट रेलवे स्टेशन से ट्रेन ड्राइवर को ट्रेन की स्पीड धीमी कर वहां से निकलने की हिदायत मिलती है। लेकिन अमृतसर में ऐसा हुआ ही नहीं।

चश्मदीद बोले अगर समय रहते सब हो जाता तो बच सकता था ये हादसा

– एक चश्मदीद ने कहा- 7 बजकर 10 मिनट पर पुतलों का दहन किया गया। अगर समय रहते यह सब हुआ होता तो हादसा बच सकता था। एक तो रोशनी होती और दूसरा उस वक्त ट्रेन का टाइम भी नहीं था।

– एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा- रेलवे ट्रैक के आसपास कोई बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। हादसे के मंजर को देखा नहीं जा सकता। ट्रैक के आसपास खून से लथपथ लाशें बिखरीं हैं।
– एक चश्मदीद ने यह भी बताया कि पटरियों से महज 200 फीट की दूरी पर पुतला जलाया जा रहा था। कार्यक्रम बिना इजाजत हो रहा था।
– एक और चश्मदीद ने कहा कि हर तरफ से लोगों के रोने-बिलखने की आवाज आ रही थी। इस हादसे के बाद लोग अपने परिजनों को तलाश रहे थे।

शवों के टुकड़े आधा किमी इलाके में बिखरे पड़े थेट्रेन गुजरने के वक्त 500-700 लोग ट्रैक पर मौजूद थे। शवों के टुकड़े आधा किमी इलाके में बिखरे पड़े थे। इन्हें समेटने में ढाई घंटे से ज्यादा वक्त लगा। ट्रेन ड्राइवर बोला- हम पूरी तरह बेबश थे। ग्राउंड में रावण जल रहा था, काफी धुआं था और कुछ दिखाई नहीं दिया।

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