कांग्रेस ने गुरुवार को दावा किया कि राफेल विमान पर सवाल करने वाले अधिकारी को नरेंद्र मोदी सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया है। अधिकारी ने 36 राफेल विमानों के लिए ‘300 फीसदी ज्यादा भुगतान करने’ पर सवाल उठाए थे। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक अखबार की रिपोर्ट शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘मोदी सरकार ने 36 राफेल विमानों के लिए 300 फीसदी अतिरिक्त राशि का भुगतान कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने पर सवाल करने वाले व्हिसलब्लोअर संयुक्त सचिव (एयर) को छुट्टी पर भेज दिया।’

रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया, ‘संयुक्त सचिव की आपत्ति को दरकिनार करने वाली अधिकारी स्मिता नागराज को यूपीएससी का सदस्य बना दिया गया। उसे मोदी सरकार को खुश करने का ईनाम मिला।’ सुरजेवाला ने जो खबर शेयर की है उसके मुताबिक 2016 में राफेल विमान समझौता होने पर इस संयुक्त सचिव ने विमानों की कीमत को लेकर सवाल किया था। यह अधिकारी विमान खरीद के लिए बातचीत करने वाली समिति का हिस्सा था। इस वजह से सौदे में देरी हुई थी।

इस मामले पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का कहना है कि यह सौदा दो देशों की सरकारों के बीच हुआ है। उन्होंने कहा कि राफेल समझौता सरकार से सरकार के बीच तय हुआ और भारत-फ्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों को लेकर जब अरबों डॉलर का यह करार हुआ था उस वक्त वह सत्ता में नहीं थे। फ्रांस के राष्ट्रपति ने यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर एक प्रेसवार्ता में दिया।

मैक्रों से जब पूछा गया था कि क्या भारत सरकार ने किसी बिंदु पर फ्रांस या फ्रांसीसी दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट से कहा था कि उन्हें राफेल करार के लिए भारतीय साझेदार के तौर पर रिलायंस को स्वीकार करना है। भारत ने करीब 58,000 करोड़ रुपए की लागत से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए गत वर्ष सितंबर में फ्रांस के साथ अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इससे डेढ़ साल पूर्व पीएम नरेंद्र मोदी ने पेरिस यात्रा के दौरान इस प्रस्ताव की घोषणा की थी। विमानों की आपूर्ति सितंबर 2019 से शुरू होगी।

साभार – अमर उजाला

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