नई दिल्ली। :- मीटू कैम्पेन में नाम आने के बाद केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके एमजे अकबर के मानहानि केस पर दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में गुरुवार को सुनवाई हुई। अकबर की ओर से सीनियर एडवोकेट गीता लूथरा ने पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि पत्रकार प्रिया रमानी का आरोपों से एमजे अकबर की मानहानि हुई है। अकबर ने 40 साल से जो प्रतिष्ठा अर्जित की थी, उस पर धब्बा लगा है। ये दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 31 अक्टूबर की तारीख तय की है।

एमजे अकबर ने आईपीसी की धारा 499 और धारा 500 के तहत केस दर्ज कराया है। इसे मानहानि का आपराधिक कृत्य माना जाता है और यदि यह आरोप साबित होता है, तो दो साल तक की सजा हो सकती है। हालांकि, इसको साबित करने की जिम्मेदारी एमजे अकबर की होगी, न कि रमानी की। इसके अलावा, यह तथ्य भी है कि अकबर जन प्रतिनिधि हैं।

रमानी को कानून के तहत 10 में से एक अपवाद मिल सकता है। इसमें से आम हैं- जनहित में जन प्रतिनिधि के खिलाफ सच लाने की कोशिश की है। दूसरी यह कि जन प्रतिनिधि के काम के खिलाफ अच्छी नीयत से अपनी बातें सार्वजनिक करना। अच्छी नीयत और लोगों के हित में दूसरे व्यक्ति के चरित्र पर लांछन लगाया है।
एक के बाद एक महिलाओं द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद एमजे अकबर ने बुधवार को विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। मी टू के तहत एम जे अकबर पर 20 महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इस्तीफा देने के बाद एम जे अकबर ने मीडिया में अपना लिखित बयान जारी कर अपनी बात कही।

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