प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि राफेल में भ्रष्टाचार का आरोप सीधा प्रधानमंत्री पर है. उनकी तरफ से दूसरे लोग सफाई दे रहे हैं. प्रधानमंत्री मौन क्यों हैं?

नई दिल्लीः राफेल सौदे पर सरकार और कांग्रेस के बीच रस्साकशी कम होने का नाम नहीं ले रही है. आज कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को राफेल डील पर फिर घेरने की कोशिश की है. दरअसल 21 सितंबर को फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा कि राफेल सौदे के लिए भारत सरकार ने अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस का नाम प्रस्तावित किया था और डसॉल्ट एविएशन कंपनी के पास दूसरा विकल्प नहीं था. इसके बाद मोदी सरकार पर राफेल सौदे में रिलायंस को फायदा पहुंचाने के जमकर आरोप लग रहे हैं.

 

कल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी के लिए कहा कि जनता के दिमाग में घुस गया है कि देश का चौकीदार चोर है. वहीं आज वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उल्टा राहुल गांधी से सवाल किया कि उन्हें कैसे पता था कि फ्रांस के राष्ट्रपति का बयान आने वाला है. इसी पर कांग्रेस ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मोदी सरकार पर राफेल सौदे से जुड़े सवालों के जरिए फिर हमला किया.

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राफेल सौदे को शताब्दी का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि सरकार के वित्त मंत्री बचाव की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके बयान से सरकार और ज्यादा घिर रही है. रक्षा मंत्री अहंकार में डूबी हुई हैं और कड़वी जवान रखती हैं. वो शहीदों और नेताओं का अपमान करती हैं और लगातार झूठ बोलती हैं.

 

प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि राफेल में भ्रष्टाचार का आरोप सीधा प्रधानमंत्री पर है. उनकी तरफ से दूसरे लोग सफाई दे रहे हैं. प्रधानमंत्री मौन क्यों हैं?

2007 में आरएफपी के लिए ग्लोबल टेंडर हुआ और 2012 में राफेल एल1 चुना गया. कॉन्ट्रेक्ट पर दोनों सरकारों के हस्ताक्षर हो चुके थे केवल लाइफ साईकल कॉस्ट पर बात रुकी हुई थी. 13 मार्च 2014 को एचएएल और डसॉल्ट के बीच वर्क शेयर अग्रीमेंट पर समझौता हो चुका था. 25 मार्च 2015 को डसॉल्ट के प्रमुख ने एक बयान दिया कि हमने कांट्रेक्ट फाइनल कर लिया है केवल दस्तखत बाकी है.

 

8 अप्रैल को विदेश सचिव ने कहा कि फ्रांस दौरे पर प्रधानमंत्री राफेल सौदे पर बात नहीं करेंगे. उस समय के रक्षा मंत्री ने कहा था कि समझौता हो चुका है. 10 अप्रैल को प्रधानमंत्री फ्रांस जाते हैं. किसी को नहीं पता कि वहां क्या होगा 28 मार्च को देश में रिलायंस की कम्पनी रजिस्टर्ड होती है.

 

टेंडर के दस्तवेज पर सब उल्लेख कि भारत की जरूरत कैसी है? सरकार गोपनीयता का बहाना बना रही है. प्रधानमंत्री को जवाब देना होगा. वित्त मंत्री जितनी बार मुंह खोलते हैं उससे प्रधानमंत्री का और पर्दाफाश होता है. फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने सच्चाई बता दी तो कष्ट हो रहा है. राहुल-ओलांद में समझौते के सवाल पर आनंद शर्मा ने कहा कि जेटली को हल्की बात नहीं करनी चाहिए. इसमें कई देश शामिल हैं. ये सवाल कई देशों में उठे हैं? सवाल पूछना अगर जुगलबंदी हो गई तो फिर मोदी और अनिल अंबानी में कौन सी जुगलबंदी है?

 

प्रधानमंत्री पर सीधा आरोप लगाते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ही अनिल अंबानी को अवगत करा दिया था कि वो राफेल सौदे से एचएएल को हटाने वाले हैं. प्रधानमंत्री ने पद की गोपनीयता का उल्लंघन किया और जानकारी अनिल अंबानी को जानकारी लीक की. कैसे किसी को पता लगा कि प्रधानमंत्री फ्रांस जाएंगे और डील पलट देंगे! किस आधार पर प्रधानमंत्री ने डील बदली? क्या किसी को खबर थी? किसी कमिटी से इजाजत ली गई?

 

डील बदलने से देश में तकनीक नहीं आई. प्रधानमंत्री इस षड्यंत्र में शामिल थे. फ्रांस से लौट कर प्रधानमंत्री ने हड़बड़ी में सीसीएस से अनुमति ली. सीसीएस कमिटी के मिनट्स सार्वजनिक किए जाने चाहिए. 15 जून 2015 को 126 जहाजों वाला कॉन्ट्रेक्ट रद्द किया गया. 526 करोड़ का जहाज 1670 करोड़ में ले आए.

 

अमित शाह के बयान पर आनंद शर्मा ने कहा कि इससे बड़ी बेहूदा बात नहीं सुनी थी. क्या जो बीजेपी को हराने की बात करेगा वो देशद्रोही हो जाएगा?

 

जेटली के बयान पर सवाल पूछा गया कि क्या आप समझते है कि केवल आप ही बुद्धिमान हैं? दूसरों को सवाल पूछने का भी अधिकार नहीं है? क्या जेटली को मालूम था कि 126 की जगह 36 जहाज की डील होने वाली है. एचएएल को किनारे किया जाने वाला है.

 

हमने प्रधानमंत्री पर षड्यंत्र का आरोप लगाया है. इसमें अश्लीलता क्या है? आयुष्मान भारत पर भी सवाल उठाते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री की हर स्कीम में राजनीति है. 100 स्मार्ट सिटी कहां हैं, 2 करोड़ रोजगार, स्टैंडअप इंडिया कहां हैं? साढ़े चार साल का हिसाब होगा तो सब साफ हो जाएगा.

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