छह साल बाद राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक हुई, मंत्री से लेकर बाक़ी अधिकारी मौजूद रहे लेकिन राहत आयुक्त संजय कुमार ही इस मीटिंग में नहीं पहुँचे.

लखनऊ: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठकों से अधिकारी ग़ायब होने लगे हैं. किसी न किसी बहाने अफ़सर मीटिंग से कन्नी काट लेते हैं लेकिन इस बार तो हद ही हो गई. छह साल बाद राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक हुई, मंत्री से लेकर बाक़ी अधिकारी मौजूद रहे लेकिन राहत आयुक्त संजय कुमार ही इस मीटिंग में नहीं पहुँचे.

मुख्यमंत्री को बताया गया कि बैडमिंटन खेलते समय संजय को चोट लग गई है. इस बात से नाराज़ सीएम योगी आदित्यनाथ ने तुरंत उन्हें हटाने का निर्देश दे दिया. योगी की बैठकों और वीडियो कॉन्फ़्रेंस से अधिकारी अब भागने लगे हैं. कई बार तो अफ़सर गप्पें लड़ाते और मोबाइल पर गेम खेलते हुए पकड़े जा चुके हैं. योगी की रोक टोक और फटकार का भी इन पर कोई असर नहीं पड़ रहा.

छह साल बाद यूपी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का पुनर्गठन हुआ था. अखिलेश यादव की पांच साल की सरकार में इसकी कोई मीटिंग नहीं हुई. सीएम योगी आदित्यनाथ ने 20 सितंबर की शाम को बैठक बुलाई थी. मुख्यमंत्री सचिवालय में बने मीटिंग हॉल में सब तय समय पर पहुँच गए.

बैठक शाम 7 बजे होनी थी. आधे घंटे की देरी से मीटिंग शुरू हुई. मंत्री स्वाति सिंह और बलदेव सिंह औलख पहुँच चुके थे. प्रमुख गृह सचिव अरविंद कुमार और कृषि उत्पादन आयुक्त भी मौजूद थे. थोड़ी देर बाद सीएम योगी भी मीटिंग में पहुँच गए लेकिन जिस अधिकारी को सबसे पहले पहुँचना चाहिए था उनका इंतज़ार ही होता रहा.

राहत आयुक्त संजय कुमार आख़िरकार नहीं आए. उन्हें ही मीटिंग का एजेंडा पेश करना था. थोड़ी देर इंतज़ार के बाद सीएम योगी ने संजय के न आने के बारे में पूछा. एक सीनियर आईएएस अफ़सर ने बताया कि बैडमिंटन खेलने के दौरान उन्हें कंधे में चोट आ गई है. इसीलिए संजय नहीं आए.

इस जवाब से योगी आदित्यनाथ संतुष्ट नहीं हुए. उनका ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था. योगी बोले “ऐसे लापरवाह अधिकारी को तुरंत हटाओ”. उनके इतना कहते ही हॉल में सन्नाटा छा गया. 2002 बैच के आईएएस अधिकारी संजय कुमार बिहार के रहने वाले हैं. उनकी पत्नी भी आईपीएस अफ़सर हैं. फ़ोटोग्राफ़ी का शौक़ रखने वाले संजय इससे पहले इलाहाबाद और सीतापुर के डीएम रह चुके हैं.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने दोपहर में ऊर्जा विभाग की बैठक बुलाई थी. इस मीटिंग से भी कुछ अफ़सर ग़ायब रहे. केन्द्रीय मंत्री आरके सिंह भी बैठक के लिए दिल्ली से आए थे. सौभाग्य योजना पर बातचीत शुरू हुई.

कई जिलों के अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ़्रेंस से जुड़े हुए थे. यूपी के बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा ने जौनपुर में योजना की प्रगति के बारे में बोलना शुरू किया तो पता चला कि वहां के डीएम अरविंद मलप्पा मीटिंग में ही नहीं आए हैं.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूछा डीएम कहां गए? तो उन्हें बताया गया कि वे छुट्टी पर हैं. योगी ने चीफ़ सेक्रेटरी अनूप चंद्र पांडे से पूछा,”मोहर्रम में इन्हें छुट्टी किसने दे दी”. सब एक दूसरे का मुँह देखने लगे. लेकिन सच यही है कि कई अधिकारी मुख्यमंत्री की बैठकों से दूर भागने लगे हैं. कोई न कोई बहाना बना लेते हैं. सीनियर अपने जूनियर अफ़सरों को मीटिंग में भेज दिया करते हैं. कई अफ़सर तो बिना तैयारी और होमवर्क के ही बैठक में पहुँच जाते हैं.

पिछले ही महीने क़ानून व्यवस्था को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक मीटिंग बुलाई थी. डीजीपी से लेकर प्रमुख गृह सचिव इसमें बुलाए गए थे. जिलों के एसपी से लेकर इलाक़े के आईजी और एडीजी भी वीडियो कॉन्फ़्रेंस से जुड़े हुए थे.

महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध पर सीएम योगी निर्देश दे रहे थे. इस दौरान एडीजी रैंक के एक आईपीएस अधिकारी चाय की चुस्की लेते हुए बात करते रहे. पहले तो योगी कुछ नहीं बोले, अफ़सर तो उनके चहेते थे लेकिन कुछ देर बाद योगी ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई.

लखनऊ में रहने पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिन भर में पांच से छह बड़ी बैठकें कर लेते हैं. सवेरे आठ बजे से लोगों से मुलाक़ात का सिलसिला शुरू हो जाता है जो देर रात तक चलता रहता है.

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