भले ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर को बनाए जाने के लिए भारतीय जनता पार्टी की नेतृत्व वाली मोदी सरकार से अध्यादेश लाने को कहा है लेकिन शायद केंद्र सरकार इस मूड में अभी नहीं है।

इकनोमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार उच्च सीनियर भाजपा नेताओं का मानना है कि जो कुछ मोहन भागवत ने कहा है वह विधिक तौर पर तो सही है लेकिन जहां तक कानून लाने की बात है अभी ऐसे कोई भी प्लान नहीं है। पार्टी भी अभी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रही है।

आपको बता दें कि विजयदशमी उत्सव के दौरान नागपुर में आरएसएस प्रमुख ने कहा था कि चाहे जो हो जाए अब तो अयोध्या में राम मंदिर बन जाना चाहिए। राम हमारे गौरव पुरुष हैं और उनका यही स्मारक होना चाहिए। सरकार इसके लिए कानून और संघ के फैसले पर साधु संत भी उसके साथ हैं।

भागवत के इस बयान पर केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा था कि करोड़ों हिंदुस्तानियों की राम मंदिर से भावनाएं जुड़ी हुई है और भारतीय जनता पार्टी भी राम मंदिर को लेकर प्रतिबद्ध है इसीलिए इस मुद्दे को चुनावी मेनिफेस्टो में जगह दी गई थी।

बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर पर रोजाना सुनवाई करने के लिए याचिका दाखिल की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कपिल सिब्बल ने कोर्ट से आग्रह किया था कि राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर सुनवाई 2019 लोकसभा चुनाव के बाद होनी चाहिए।

अब जब के 2019 के चुनाव नजदीक आ चुके हैं सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने चुनावी बिगुल फूंक दिए हैं। इसी बीच आर एस एस और भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से राम मंदिर निर्माण का मुद्दा सामने लाना शुरू कर दिया है। कभी भारतीय जनता पार्टी के नेता तो कभी आरएसएस प्रमुख राम मंदिर बनाए जाने की वकालत करते नजर आते हैं लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

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