जैसे ही चुनाव क़रीब आते हैं आरएसएस व भाजपाइयों को याद आते है, राम मंदिर निर्माण के वादे करके आई पूर्ण बहुमत से भाजपा सरकार 4.5 साल में भी मंदिर का निर्माण नही करा पाई है लेकिन जैसे ही आगामी लोकसभा चुनाव 2019 क़रीब आये तो फ़िर से राम मंदिर के मुद्दे को उठाने लग गई है, व RSS नेता सुप्रीम कोर्ट को डरा व धमका रहे है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कहना है कि राम मंदिर मसले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS सुप्रीम कोर्ट को डराने-धमकाने का काम कर रहा है, जो कि लोकतंत्र के लिए घातक है. यह देश संविधान से चलेगा, किसी भी संगठन की मनमर्जी से नहीं. पार्टी ने यह प्रतिक्रिया संघ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर की गई हालिया बयानबाजी पर दी.

राकांपा ने संघ की बयानबाजी को स्वस्थ लोकतंत्र के लिए घातक करार देते हुए उसे तुरंत रोके जाने की बात कही है.
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने IPN से बातचीत में राम मंदिर मुद्दे पर कहा कि संघ सुप्रीम कोर्ट को डराने-धमकाने का काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा, उसे हर व्यक्ति और संगठन को मानना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले या बाद कोई भी ऐसी कोशिश देश-विरोधी और गैर संवैधानिक होगी. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति या संगठन को चाहे वो कितना भी ताकतवर या शक्तिशाली क्यों न हो, देश की सर्वोच्च न्यायपालिका को धमकाने या डराने का या चुनौती देने का कोई हक नहीं.

आगे कहा कि यह देश संविधान से चलेगा किसी भी संगठन की मनमर्जी से नहीं. जो भी व्यक्ति या संगठन लगातार सुप्रीम कोर्ट धमकाने का काम कर रहे हैं, यह केंद्र सरकार का दायित्व है कि ऐसे संगठनो और व्यक्ति पर कार्यवाही करे. यह केंद्र सरकार का दायित्व है, संवैधानिक जिम्मेदारी है.

डॉ. दीक्षित ने कहा कि चुनाव से पूर्व व त्योहारों के वक्त में ऐसे बयान सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का काम करते हैं, जिससे प्रदेश में शांति भंग की प्रबल संभावना है. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ना मानना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होती है लेकिन RSS प्रमुख व नेता लगातार अपनी बयानबाजी चालू रखे हुए हैं।

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